क्या है कॉपर-टी और इसे कैसे इस्तेमाल किया जाता है | What is copper t and how it is use |



महिलाओं को अनचाहे गर्भ से बचने के लिए बाजार में अनेक तरह की गर्भनिरोधक गोलियां उपलब्ध है| गोलियों के अलावा अन्य उपाय भी किये जा सकते है जैसे कंडोम का इस्तेमाल इत्यादि| कॉपर-टी भी अनचाहे गर्भ से बचने के लिए एक कारगर उपाय माना जाता है| हालाँकि ऐसा कहा जाता है कि गर्भपात करने के लिए दवाओं का नियमित सेवन करना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है इसलिए अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कॉपर-टी का प्रयोग करना सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि इसमें अन्तरागर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण या आईयूडी तत्व होने के कारण इससे महिलाओं को तीन या पांच साल तक अनचाहे गर्भ से मुक्ति मिल जाती है| कॉपर-टी को प्लास्टिक और कॉपर के बने हुए सूक्ष्म उपकरणों से बनाया जाता है और इसे टी का आकार दिया जाता है इसलिए भारत में सबसे ज्यादा कॉपर-टी का ही इस्तेमाल किया जाता है|

सबसे पहले जान लेते है कि कॉपर-टी क्या है |

copper t


जिन महिलाओं ने हाल ही में किसी नवजात को जन्म दिया है उनके लिए दूसरा बच्चा होने तक गर्भ से बचने के लिए कॉपर-टी एक अन्तरागर्भाशयी उपकरण लगाया जाता है जो उनकी लिए बहुत प्रभावी होता है| कॉपर-टी को किसी विशेषज्ञ की मदद से ही प्रयोग में लाना जरूरी है क्योंकि इसके इस्तेमाल की प्रक्रिया बहुत संवेदनशील होती है| कॉपर–टी को महिला के गर्भाशय में फिट किया जाता है इसमें एक प्लास्टिक का धागा होता है जो आईयूडी से बंधा होने के साथ साथ गर्भाशय ग्रीवा से योनि तक लटका हुआ होता है|

कॉपर-टी की कार्यप्रणाली कैसी है |

कॉपर-टी को एक बार फिट करने या लगाने के बाद प्लास्टिक और कॉपर के मिश्रण से बने तत्व के तार से कॉपर के आयन निकलने लगते है जो गर्भाधान को रोक देते है क्योंकि कॉपर के आयन गर्भाशय के तरल और गर्भाशयी ग्रीवा के श्लेष्म के साथ मिश्रित होने के कारण ही ऐसा होता है|
इनमे मिलने के बाद कॉपर आयन गर्भाशय के तरल शुक्राणुओं को खत्म करने लगते है और इनको पूर्ण रूप से साफ कर देते है| इन शुक्राणुओं के लिए कॉपर का आयन ज़हर के समान होता है| अगर कभी कभार कोई शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करने में सफल हो जाता है तो कॉपर आयन के प्रभाव से निषेचित अंडे में गर्भ धारण नहीं होता है और इस तरह से महिलाओं को अनचाहे गर्भ से छुटकारा मिल जाता है|
कितने दिन कॉपर-टी का प्रभाव रहता है |
कॉपर-टी कितने दिनों तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है यह उसमे लगे उपकरणों पर निर्भर करता है| अच्छे उपकरणों से बनायीं गयी कॉपर-टी लगभग दस सालों तक किसी महिला को सुरक्षित रख सकती है लेकिन हाल ही में बनाये गए उपकरणों से युक्त टी केवल चार या पांच सालो तक ही सुरक्षा दे पाने में सक्षम है| इसके अलावा किसी महिला को कॉपर- टी लगवाने के दो या तीन साल बाद गर्भधारण की इच्छा होती है तो एक साधारण सी प्रक्रिया द्वारा इसे निकलवाया भी जा सकता है| इसके लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर लेना चाहिए|

कॉपर-टी के नुक्सान या साइड इफ़ेक्ट |

कॉपर-टी लगवाने के बाद शुरुआती कुछ महीनो तक महिलाओं को असमय रक्तस्त्राव की समस्या हो सकती है| इसके अलावा माहवारी के समय होने वाले दर्द की शिकायत भी हो सकती है| असमय होने वाला रक्तस्त्राव तो कुछ समय बाद स्वयं ही बंद हो जाता है लेकिन दर्द से निजात पाने के लिए आप दर्द नाशक दवाओं का इस्तेमाल कर सकती है|

कुछ महिलाओं को कॉपर-टी लगवाने के बाद एलर्जी की समस्या हो सकती है| इसके प्रभाव से महिलाओं के जननांगो में दाने हो जाते है और उनमे खुजली की समस्या हो सकती है| अगर किसी महिला को इस तरह की समस्या होने लगती है कॉपर-टी को उसी समय निकलवा देना चाहिए तथा अन्य गर्भनिरोधक उपायों के प्रयोग के लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए|

कॉपर-टी को प्रसव के तुरंत बाद लगाने से यह स्वयं ही हट जाती है या बाहर निकल जाती है| हालाँकि ऐसा बहुत कम देखा गया है लेकिन कुछ महिलाओं में इस तरह की समस्या भी देखी गयी है|

कॉपर-टी लगवाने से गर्भाशय सम्बन्धी समस्याएँ भी हो सकती है क्योंकि यह उपकरण लगाते समय गर्भाशय में छेद होना या कटाव भी हो जाता है तथा इससे गर्भाशय में घाव या रक्तस्त्राव होने लगता है| ऐसी स्थिति में कॉपर-टी को निकलवा देना चाहिए नहीं तो किसी गंभीर संक्रमण की सम्भावना बन सकती है|

आज हमने आपको कॉपर-टी के प्रयोग और इसके लाभ हानि के बारे में बताया है| इसके फायदे होने के साथ साथ कुछ नुक्सान भी है | इसलिए इसकी पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त करके ही किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर प्रयोग में लायें|


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