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महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के घरेलू उपाय | Increase woman fertility


शादी के बाद प्रत्येक दम्पति संतान का सुख प्राप्त करना चाहते है और इसके लिए उनमे आवश्यक प्रजनन क्षमता की जरूरत होती है | लेकिन कई बार प्रजनन क्षमता में कमी होने से महिलाओं को संतान की प्राप्ति नहीं हो पाती है और उनका संतान प्राप्ति का सपना भी कभी पूरा नहीं हो पाता है 

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पुरुषों और महिलाओं दोनों में संतान प्राप्ति के लिए आवश्यक प्रजनन क्षमता का होना बहुत जरूरी होता है लेकिन आजकल प्रजनन क्षमता में कमी आने के कई कारण हो सकते है जो व्यक्ति के अन्दर प्रजनन क्षमता को घटा रहे है | मानसिक तनाव या उचित रूप से आहार ना लेने से भी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है | इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ उपाय प्रयोग में लाकर फायदा लिया जा सकता है और संतान की प्राप्ति की जा सकती है |

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है | इन उपायों से आपको संतान प्राप्ति का सुख मिल सकता है जो आपकी शादीशुदा जिंदगी की खुशियाँ बनाये रखने के लिये बहुत जरूरी है | आइये जानते है प्रजनन क्षमता बढ़ाने के खास उपायों के बारे में जो आपके सामने इस तरह से है :

पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें :

प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही उचित मात्रा में पोषक देने वाले आहारों का सेवन करना चाहिए | इनसे शरीर को स्वस्थ रखने में बहुत मदद मिलती है साथ ही गर्भ धारण करते समय आने वाली समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है |

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बढ़ते वजन को नियंत्रित करने के लिए उपाय करें :

महिलाओं का वजन ज्यादा होने के कारण उन्हें गर्भ धारण करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है | इसलिए उन्हें अपने बढ़ते वजन को नियंत्रित करने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए | इसके लिए व्यायाम आदि करके फायदा लिया जा सकता है साथ ही प्रजनन क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है |

शरीर को भरपूर आराम देना चाहिए :

दिन भर काम करते हुए व्यक्ति का शरीर थक जाता है जिसके बाद उसे भरपूर आराम की जरूरत होती है | इसलिए आपको भरपूर आराम करने के साथ साथ पूरी नींद भी लेनी चाहिए क्योंकि नींद ना लेने से व्यक्ति तनावग्रस्त रहने लगता है | इससे आपकी कामेच्छा भी प्रभावित होने लगती है | इन सब समस्याओं से प्रजनन क्षमता घटने लगती है जो आपको संतान प्राप्ति में परेशानी का कारण बनती है | इन सभी समस्याओं से बचने के लिए शरीर को भरपूर आराम देना चाहिए |

नशा करने वाली चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए :

किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करने या उसकी आदत पड़ने पर व्यक्ति की प्रजनन क्षमता प्रभावित होने लगती है | चाहे महिला हो या पुरुष नशे का सेवन दोनों के लिए बेहद खतरनाक होता है | नशे का सेवन करने वाली महिलाओं के गर्भाशय में भ्रूण का आरोपण भी रुक सकता है | नियमित रूप से एल्कोहल या अन्य नशीली सामग्री का सेवन करने से शुक्राणु का उत्पादन और अण्डोत्सर्ग भी खराब होने की संभावना हो सकती है | इसलिए इन सभी समस्याओं से बचने के लिए शराब व अन्य नशीली चीजों के सेवन से परहेज रखना चाहिए |

दूध से बने पदार्थों का सेवन करना चाहिए :

हाल ही में हुए शोध के अनुसार नियमित रूप से वसायुक्त आहार का सेवन करने वाली महिलाओं में बांझपन की समस्या सामान्य की अपेक्षा लगभग एक चौथाई कम होने लगती है क्योंकि दूध से बने पदार्थों का सेवन करने से अंडाशयों को उचित रूप से कार्य करने की क्षमता प्रदान की जा सकती है | इसलिए महिलाओं को नियमित रूप से दूध और दूध से बने पदार्थों का भरपूर सेवन करके लाभ लेना चाहिए |

नियमित रूप से भरपूर पानी का सेवन करें :

पानी हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है और नियमित रूप से उचित मात्रा में पानी का सेवन करने से प्रजनन क्षमता में वृद्धि होने के साथ साथ शरीर को कई रोगों के प्रभाव से बचाने में मदद ली जा सकती है | उचित मात्रा में पानी पीने से फूले हुए अंडकूप बनने लगते है जो प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मददगार होते है | इसलिए ये सभी फायदे लेने के लिए रोजाना दस से 15 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए |

कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन ज्यादा ना करें :

अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट युक्त आहारों का सेवन करने से रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने लगती है जिसके कारण इंसुलिन के लेवल में वृद्धि होने लगती है जो हमारी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने लगता है | इसलिए हमें कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार जैसे मेदे के बने ब्रेड, पास्ता और अन्य चीजों के सेवन से परहेज रखना चाहिए तथा स्वयं को इन सभी समस्याओं से बचाना चाहिए |

रोजाना व्यायाम करके फायदा लें :

शरीर को मजबूत बनाने के साथ साथ प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए व्यायाम करना बहुत फायदेमंद रहता है | इससे रक्त संचार में वृद्धि होने लगती है तथा व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से हमेशा स्वस्थ रहता है | इसलिए हमें नियमित रूप से व्यायाम करके खुद को फिट रखना चाहिए |

वजन को सामान्य से कम ना होने दें :

वजन ज्यादा कम होने के कारण शरीर दुबला पतला होने लगता है जिसके कारण गर्भ धारण करने में समस्या होने लगती है | इसलिए प्रजनन क्षमता बढ़ाने और समस्याओं से बचने के लिए शरीर के वजन को नियंत्रित करते हुए शारीरिक रूप से मजबूत बनना चाहिए |

विटामिन डी प्राप्त करें :

विटामिन डी का सबसे बड़ा स्त्रोत सूर्य की रोशनी को माना जाता है | इसलिए रोजाना थोड़ी देर तक सूर्य की रोशनी में बैठना चाहिए जिससे आपको आवश्यक मात्रा में विटामिन डी की प्राप्ति हो सकें | इससे आपकी प्रजनन क्षमता में वृद्धि होने लगती है साथ ही विटामिन डी युक्त आहारों का सेवन करके भी फायदा लिया जा सकता है |

एंटीऑक्सीडेंट से युक्त आहारों का सेवन करें :

मनुष्य की प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए एंटीऑक्सीडेंट से युक्त आहारों का सेवन उचित मात्रा में करना चाहिए | हरी सब्जियों, टमाटर, हरी मिर्च और संतरे का सेवन करके एंटीऑक्सीडेंट की प्राप्ति की जा सकती है | इसलिए हमें इन सभी को अपने आहार में नियमित रूप से शामिल करके फायदा लेना चाहिए |

ओमेगा 3 फैटी एसिड का सेवन करें :

ओमेगा 3 फैटी एसिड का सेवन करके प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और गर्भपात के खतरे को दूर करने में मदद ली जा सकती है | सालमोन और अलसी के बीजों में उचित मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है | इसलिए हमें इसका सेवन नियमित रूप से अपने आहार के साथ करके प्रजनन क्षमता में वृद्धि करनी चाहिए तथा इसके अन्य लाभ भी लेने चाहिए |

फोलिक एसिड :

फोलिक एसिड का प्रयोग करके भी प्रजनन क्षमता में वृद्धि करने में मदद ली जा सकती है | इसलिए हमें अपने आहार में फोलिक एसिड प्रदान करने वाले तत्वों जैसे गोभी, बीट रूट, केला, ब्रोकली, अं‍कुरित दालें आदि को शामिल करना चाहिए |

आप इन उपायों को प्रयोग में लाकर अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकते है और गर्भधारण करने के दौरान आने वाली समस्याओं को दूर करने में सफल हो सकते है | अगर आपको इन उपायों से भी भरपूर लाभ ना मिले तो आपको किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर गर्भधारण करने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए | इसके अलावा आपको अपने खानपान सम्बन्धी भी कुछ बातों के प्रति ध्यान देना चाहिए और कभी भी शारीरिक रूप से नुकसान देने वाले आहारों के सेवन से बचना चाहिए | इस तरह से आप अपनी प्रजनन क्षमता में वृद्धि करने के साथ साथ संतान प्राप्ति का सुख पा सकते है और अपनी शादीशुदा जिंदगी में नई खुशियाँ लाने में सफल हो सकते है |









ये दाल बना सकती है आपको अपंग | ye daal aapko bana sakti hai handicap



दाल गरीबों का सबसे अच्छा और बढ़िया भोजन माना जाता है | नियमित रूप से दाल का सेवन करने से मनुष्य को उचित मात्रा में प्रोटीन और विटामिन प्राप्त होते है जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए फायदेमंद होते है | शाकाहारी व्यक्ति दाल का बड़े पैमाने पर प्रयोग करते है |

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दाल के इतने सारे फायदे होने के बाद भी इसके सेवन से शरीर को कई तरह के नुकसान हो सकते है | हाल ही में किये गए सर्वे के अनुसार वर्तमान समय में प्रयोग में की जानी वाली दाल के सेवन से व्यक्ति अपंग भी हो सकता है | हालाँकि दाल में कोई दोष नहीं है लेकिन वर्तमान समय में व्यापारियों के बढ़ते लालच ने दाल को खराब कर दिया है |

पैसे कमाने के चक्कर में व्यापारी दाल में कई तरह की चीजों की मिलावट करने लगे है जो प्रोटीन और आवश्यक तत्वों की बजाय नुकसानदायक और जहरीले होते है | आज कल जो दाल बाजार में मिलती है उसके सेवन से मनुष्य को अनेकों बीमारियाँ होने की संभावना हो सकती है | जब मनुष्य एक समय में कई बिमारियों की चपेट में रहता है तो शरीर अपंग होने की संभावना भी बन सकती है | शरीर पर इस तरह के प्रभाव होने के कई कारण हो सकते है लेकिन वर्तमान समय में अरहर की दाल में खोसरी की दाल मिलाने से भी ऐसा हो सकता है |

अरहर की दाल में खरोई दाल :

ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में व्यापारी दाल में कई तरह की चीजें मिलाते है इनमे कंकड़, पौधे और डंठल आदि शामिल है | हालाँकि इन चीजों को आसानी से पहचान कर दाल से अलग किया जा सकता है और इनसे व्यक्ति को ज्यादा नुकसान भी नहीं होता है लेकिन इनके अलावा दाल में जो चीजें मिलायी जाती है उनका प्रभाव बहुत घातक होता है | अरहर की दाल में खोसरी की दाल का मिश्रण करके सेवन करने से व्यक्ति के शरीर का निचला हिस्सा अपंग हो सकता है | खोसरी की दाल निम्न दर्जे की दाल है जिसे कुछ समय पहले प्रतिबंधित भी कर दिया गया था |

खोसरी की दाल :

ये दाल देखने में बिलकुल अरहर दाल जैसी ही लगती है जिसकी वजह से अरहर दाल में इसका मिश्रण करने पर आसानी से इसे पहचाना भी नहीं जा सकता है | इससे व्यापारियों को बहुत फायदा होता है | वर्तमान समय में ज्यादातर घरों में अरहर की दाल का नियमित रूप से सेवन किया जाता है जिसके कारण मिलावटी सामान भी जल्दी जल्दी खत्म होने लगता है और व्यापारियों को ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के अवसर मिल जाता है |

कब और क्यों लगी थी पाबंदी :

वर्ष 1961 में खोसरी की दाल को सरकार दवारा प्रतिबंधित कर दिया गया था | खोसरी की दाल बहुत ही सस्ती और निचले दर्जे की दाल है जिसका इस्तेमाल पशुओं के लिए चारे के रूप में किया जाता था | इसके सेवन से पशुओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ने लगा था जिसके कारण सरकार ने इस दाल की बिक्री पर रोक लगा दी |

वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान पाया कि खोसरी की दाल में ठक्जेलीडाई-अमीनो-प्रोपियोनिक अम्ल (ओडीएपी) पाया जाता है जिसके कारण शरीर का निचला हिस्सा प्रभावित होकर अपंग हो सकता है | इस दाल के प्रभाव से पैर और तंत्रिका तन्त्र सुन्न होने लगते है | इस समस्या को लैथीरिज्म रोग के नाम से भी जाना जाता है | मनुष्य और पशु दोनों को इस तरह के रोग होने की संभावना हो सकती है | जब व्यक्ति इस रोग से ग्रस्त हो जाता है तो व्यक्ति का निचला हिस्सा काम नहीं करता है |

हालाँकि केंद्र सरकार ने कुछ समय बाद इस दाल की बिक्री से प्रतिबंध को हटा लिया था जिसके बाद बाजार में दोबारा इसकी बिक्री होने लगी है | जो व्यक्ति निम्न स्तर के या गरीब है वे लोग इसका ज्यादा सेवन करने के लिए मजबूर होते है | लेकिन इसके सेवन से उन्हें गंभीर बीमारी होने की आशंका रहती है | इसलिए उन्हें इसके बुरे प्रभावों को देखते हुए इसके सेवन से परहेज रखना चाहिए |

ऊपर दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए हमें खोसरी की दाल के सेवन से परहेज रखते हुए स्वयं को बिमारियों के प्रभाव से बचाना चाहिए और हमेशा स्वस्थ और निरोगी जीवन जीना चाहिए |






कौन कौन सी चीजें एक साथ खाने से होते है नुकसान | kaun kaun si chijen ek sath khane se hote hai nuksan



कुछ चीजें मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होने के बावजूद भी उनके सेवन से नुकसान हो सकता है | आयुर्वेद के अनुसार भी कुछ ऐसी चीजें निर्धारित की गयी है जिन्हें मनुष्य को एक साथ सेवन नहीं करना चाहिए नहीं तो बेहद फायदेमंद होने पर भी ये आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है | इसलिए अगर आप स्वस्थ और निरोगी रहना चाहते है तो आपको खाने से पहले कुछ बातों के बारे में विचार कर लेना चाहिए अन्यथा आपको समस्या हो सकती है |

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अगर आप दो पौष्टिक चीजों को एक साथ खाते है और उनमे परस्पर मेल ना हो तो उससे आपके शरीर में विषाक्त कण फैल सकते है | अगर दो ऐसी चीजें एक साथ खायी जाएँ तो आपको पाचन तंत्र सम्बन्धी कई तरह की समस्याएँ होने की संभावना भी बन सकती है | पाचन तन्त्र बिगड़ने से पेट सम्बन्धी कई समस्याएँ होने लगती है | इन सभी समस्याओं से बचने के लिए आपको परस्पर विरोधी भोजन के बारे में उचित जानकारी लेनी चाहिए |

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से परस्पर विरोधी भोजन के बारे में जानकारी देने जा रहे है जिससे आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिल सकती है | आइये जानते है इस सम्बन्ध में खास जानकारी जो आपके सामने इस तरह से है :

खाना खाते समय कभी भी दूध के साथ प्याज नहीं खाना चाहिए | इनका सेवन एक समय और एक साथ करने से आपको त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे दाद , खाज , खुजली, एगसिमा , सोराईसिस आदि होने की समस्या हो सकती है | इसलिए इन सभी समस्याओं से बचने के लिए प्याज और दूध का सेवन एक साथ कभी भी नहीं करना चाहिए |

दूध के साथ कटहल का सेवन भी नहीं करना चाहिए | इनके सेवन से भी कई तरह की परेशानियाँ होने की संभावना बन सकती है |

कभी भी खट्टे फलों के साथ दूध का सेवन नहीं करना चाहिए | खट्टे फलों जैसे संतरा , इमली , कच्चा आम , अमचूर आदि के साथ दूध पीने से शरीर को नुकसान हो सकता है |

कभी भी घी के साथ शहद का मिश्रण करके सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनसे नुकसान हो सकता है | हालाँकि पंचामृत में दूध, दही, चीनी के साथ घी और शहद का मिश्रण किया जाता है लेकिन इसमें इनका विरोधीपन कम हो जाता है जिसके कारण इसके सेवन से नुकसान होने की संभावना कम होने लगती है |

दही के साथ उड़द की दाल का सेवन करना भी हानिकारक हो सकता है | एक साथ इन दोनों का सेवन करने से सामान्य व्यक्ति की तुलना में व्यक्ति का रक्त चाप 25 % तक बढ़ जाता है | अगर इनका सेवन लगातार कुछ महीने तक किया जाए तो इसे दिल का दौरा पड़ने की समस्या भी हो सकती है |

दूध का साथ किसी भी प्रकार के खट्टे फल का सेवन नहीं करना चाहिए | इनका सेवन एक साथ करने से स्वास्थ्य सम्बन्धी कई तरह के नुकसान होने की संभावना हो सकती है |

कभी भी हल्दी और दही का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए | अगर इनका सेवन एक साथ करने से पीलिया रोग होने की समस्या हो सकती है |

वैसे तो मछली का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद रहता है लेकिन इसका सेवन दूध, गुड़, शक्कर और शहद के साथ करने से नुकसान हो सकता है |

घी को हमेशा कांच या मिटटी के बर्तन में ही रख कर सेवन करना चाहिए क्योंकि कांसे के बर्तन में घी रखने से घी जहरीला होने की संभावना हो सकती है |

कभी कभी भोजन स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही अगर विपरीत खाद्य से तालमेल ना बने तो उससे फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है | इसलिए खाना खाते समय इनके विपरीत खाद्य पदार्थों का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है क्योंकि अगर इन बातों का ध्यान नहीं रख जाए तो आपका स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बन सकती है |






क्या आपको पता है कि हार्ट रेट 100 बीट्स प्रति मिनट क्यों होती है |



एक सामान्य व्यक्ति का दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है लेकिन कभी कभी सामान्य व्यक्तियों में भी हार्ट रेट 60-90 बीट्स तक हो जाती है | दिल की धड़कन घटती बढ़ती रहती है लेकिन जब आपके दिल की धड़कन 100 के पार होने लगे तो आपको परेशानी होने लगती है | इस समस्या को टैकीकार्डिया (tachycardia) के नाम से जाना जाता है |

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कुछ लोग दिल सम्बन्धी बिमारियों से ग्रस्त रहते है जिनके लिए ऐसी स्थिति होने का कारण उनके हार्ट का इलेक्ट्रिक सिस्टम प्रभावित होना है | इसी वजह से हार्ट रेट नार्मल नहीं रहती है | कई बार इस तरह की समस्या सामान्य व्यक्तियों में भी देखी जाती है क्योंकि उनमे भी कई बार हार्ट के इलेक्ट्रिक सिंग्लिग में खराबी होने से ऐसा हो सकता है |

आज हम आपको दिल की धड़कन असामान्य होने के कारणों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें जानकर आपको पता चल सकता है कि आप किसी बीमारी से ग्रस्त है या नहीं | इसके साथ साथ आपको इसका उपचार करने में भी आसानी हो सकती है | इसलिए आइये जानते है इस विषय से सम्बंधित कुछ खास जानकारी जो आपके सामने इस तरह से है :

ऑटोमैटिसिटी (Automaticity) :

मनुष्य के शरीर में हार्ट रेट इलेक्ट्रिक इम्पल्स होती है जिसके कारण हार्ट की पम्पिंग को नियंत्रण में किया जाता है | इसी वजह से हमारा दिल पम्प करता है और धड़कता रहता है | यह इलेक्ट्रिक सिग्नल्स एक निश्चित मार्ग जिसे एवी नोड कहते के जरिए अपर चैम्बर से लोअर चैम्बर की तरफ जाते हैं |

जब व्यक्ति सामान्य रूप से बैठा रहता है या आराम करता है तो उसकी नार्मल हार्ट बीट्स 60 से 90 बीट्स प्रति मिनट के आस पास रहती है लेकिन जब वो किसी गतिविधि में लग जाता है तो हार्ट बीट्स भी बढ़ने लगती है और उस समय ये 120/130 बीट्स प्रति मिनट तक बढ़ जाती है |

हालाँकि इनके इस तरह से बढ़ने से कोई गंभीर समस्या नहीं होती है क्योंकि कई बार बिना किसी वजह के अपर और लोअर चैम्बर की मसल्स हाइपरएक्टिवेटिड होने के कारण भी ऐसा हो सकता है |  जब आपके अपर चैम्बर में हाइपरएक्टिविटी होती है तो अट्रियल टैकीकार्डिया (atrial tachycardia) बनने लगता है और जब लोअर चैम्बर में ऐसा होता है तो वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (ventricular tachycardia) बनता है | इसी वजह से आपकी हार्ट बीट 140 के आस पास भी पहुँच जाती है |

अबनॉर्मल कंडक्टशन :

जब इलेक्ट्रिक इम्पल्स इलेक्ट्रिसिटी पास करने के लिए जो रूट लिए जाते है तो इस तरह की स्थिति बन सकती है | जब किसी बच्चे का जन्म होता है या व्यक्ति की उम्र ज्यादा होने लगती है तब भी ऐसा हो सकता है | जब एक रूट से होकर इलेक्ट्रिक इम्पल्स लोअर चैम्बर तक पहुंचते है और दूसरे रूट से होते हुए अपर चैम्बर तक जाते है तो टैकीकार्डिया की संभावना होने लगती है |

ट्रिगर एक्टिविटी :

इस तरह की स्थिति में हार्ट बीट को बाहरी तत्व प्रभावित करने लगते है जिसके कारण हार्ट बीट बढ़ने लगती है | कई बार ऐसा किसी दवा के संक्रमण के कारण भी हो सकता है जिससे हाइपरएक्टिविटी होने लगती है और दिल की धड़कन बढ़ने लगती है |

किसी रोग जैसे एनीमिया, ब्लीडिंग, बुखार, चोट या दर्द, थाइरोटाक्सीकोसिस और इन्फेक्शन आदि से ग्रस्त होने पर भी व्यक्ति की हार्ट बीट नार्मल नहीं रहती है | थाइरोटाक्सीकोसिस रोग से ग्रस्त होने पर इलेक्ट्रिकल इम्पल्स साइनस नोड पर रुक जाती हैं और इस स्थिति में हार्ट बीट 130 से 140 बीट्स प्रति मिनट होने लगती है | हालाँकि कुछ उपायों दवारा इस समस्या को ठीक किया जा सकता है |

दिल की धड़कन या हार्ट बीट का सामान्य से असामान्य होना कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन अगर किसी रोग से ग्रस्त होने के बाद ऐसा लगातार होने लगे तो आपको ऐसी स्थिति में किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेकर उचित उपाय कर लेना चाहिए ताकि आगे चलकर इसके कारण कोई गंभीर समस्या ना होने पाए |







मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से खराब हो सकती है बच्चों की आँखें |



आज के दौर में मोबाइल और इन्टरनेट के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है क्योंकि जब तक आप मोबाइल या लैपटॉप के जरिये इन्टरनेट से नहीं जुड़ जाते तब तक आपको चैन नहीं आता है | उसी तरह से ज्यादातर लोग ऑफिस में घंटों तक लैपटॉप या पीसी पर काम करते है जिसके कारण उनकी आँखें कमजोर होने लगती है |

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वयस्कों को तो मोबाइल और लैपटॉप के इस्तेमाल से ज्यादा नुकसान नहीं होता है लेकिन बच्चों की आँखों पर इनका बहुत बुरा असर होने लगता है | इनके कारण उनके आँखों की रोशनी हमेशा के लिए भी जा सकती है | कम उम्र के बच्चों की आँखों पर उस चमकती रोशनी का बहुत बुरा असर पड़ता है जिसके कारण उनको आँखों सम्बन्धी अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है |

लगातार स्क्रीन की तरफ देखते रहने और पलके झपकने के कारण आँखों पर दबाव बढ़ने लगता है जिसके कारण आँखों में जलन, खुजली और पानी आना आदि समस्याएँ होने लगती है | आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बच्चों की आँखों पर मोबाइल और लैपटॉप के बढ़ते इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में बताने जा रहें है | इन्हें जानने के बाद आप अपने बच्चों को इन समस्याओं से बचाने के लिए कुछ उपायों का सहारा ले सकते है | आइये जानते है इस विषय से सम्बंधित कुछ खास जानकारी जो आपके सामने इस प्रकार से है :

फोकस करने की क्षमता पर प्रभाव  :

जब बच्चे एलसीडी और एलइडी डिस्प्ले पर कोई चीज ज्यादा समय तक देखते रहते है तो इससे निकलने वाली तेज रोशनी से उनके फोकस करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है क्योंकि इनको बनाने के लिए लाइट सम्बन्धी टेक्नोलॉजी में ब्लू डायोड लाइट का प्रयोग किया जाता है | इसी वजह से ज्यादा समय तक मोबाइल या लैपटॉप का प्रयोग करने से बच्चों की आँखों की मांसपेशियों में थकावट होने लगती है | अगर बच्चे के साथ नियमित रूप से ऐसा होने लगता है तो उसका ध्यान किसी भी चीज में नहीं लगेगा क्योंकि उसकी फोकस करने की क्षमता कमजोर होंने लगती है |

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सिर दर्द की समस्या :

वर्तमान समय में ज्यादातर बच्चे सिरदर्द की समस्या से ग्रस्त पाए जाते है क्योंकि वे ज्यादातर समय कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल का प्रयोग करते हुए बिताते है इसी वजह से सिरदर्द से ग्रस्त रहते है | अगर आपको मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करना है तो आपको अपने और इनके बीच एक निश्चित दूरी रखनी चाहिए ताकि आपकी आँखों पर इनकी स्क्रीन का ज्यादा असर ना पड़े |

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम :

आज के समय में अधिकतर लोग इस समस्या से ग्रस्त पाए जाते है क्योंकि ऑफिस या घर में उन्हें लगातार कई घंटों तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करना पड़ता है | बच्चे भी जब इन चीजों पर ज्यादा समय देने लगते है तो उन्हें आँखों में जलन, सिर में दर्द, गर्दन में दर्द आदि समस्याएँ होने लगती है | इनका सबसे मुख्य कारण यह है कि कंप्यूटर या लैपटॉप पर ज्यादा समय तक काम करने से पलकें बहुत कम झपकती है जिसके कारण आपकी आँखों का तरल एयर कंडीशनर की हवा के कारण सूखने लगता है | इसी वजह से ज्यादातर बच्चे और बड़े भी आँखों की समस्याओं से ग्रस्त पाए जाते है |

मायोपिया :

यह आँखों से सम्बंधित एक ऐसा रोग है जिसकी चपेट में बच्चे और बड़े दोनों वर्ग के लोग है| वर्तमान समय में लगभग 60 % से ज्यादा व्यक्ति आनुवांशिक कारणों की वजह से इस समस्या से ग्रस्त पाए जाते है | कुछ समय पहले हुए एक सर्वे के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस का अधिक इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति मायोपिया रोग से ग्रस्त पाए जाते है जबकि सामान्य व्यक्तियों में इस रोग की संभावना कम रहती है | इसलिए छोटे बच्चों को कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल के इस्तेमाल से दूर ही रहना चाहिये या उन्हें इनका इस्तेमाल ज्यादा समय तक नहीं करना चाहिए |

अक्सर छोटे बच्चे कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का प्रयोग करते है तो उन्हें आँखों के साथ साथ अन्य रोग भी होने लगते है | ऐसे बच्चों में मोटापे की समस्या बहुत अधिक होने की संभावना होती है | इसके साथ साथ हर समय मोबाइल या लैपटॉप पर कम करते समय गर्दन को झुकाए रहने से आपकी बॉडी पॉश्चर बिगड़ने लगती है | इसलिए बच्चों को हमेशा इन सभी परेशानियों से दूर रखने के लिए कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल के इस्तेमाल से दूर ही रखना चाहिए |

पेरेंट्स अपने बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के साइड इफ़ेक्ट से बचाने के लिए कुछ खास उपाय अपना कर लाभ ले सकते है | इनमे से कुछ खास आपके सामने इस प्रकार से है :

छोटे बच्चों को कंप्यूटर और मोबाइल के ज्यादा प्रयोग नहीं करने देना चाहिए | इसके लिए आप कुछ समय उनके साथ बैठकर उनकी कार्यविधि देख सकते है |

जब कभी आपका बच्चा कंप्यूटर का इस्तेमाल करे तो उसे एंटी-ग्लेयर ग्लासेज पहनने के लिए बोलना चाहिए ताकि स्क्रीन की तेज लाइट का प्रभाव उसकी आँखों पर ना पड़ें |

बच्चों को इनके बुरे प्रभाव से बचाने के लिए उन्हें अर्गोनोमिक्स की सही जानकारी बतानी चाहिए | जब आपका बच्चा ज्यादा समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम कर रहा हो तो उसके पास जाकर उसे बीच में थोड़ा आराम करने की सलाह देनी चाहिए जिससे उसकी आँखों पर लगातार पड़ रहा प्रभाव कम हो जाये | इसके साथ साथ आप अपने बच्चे को आँखों में ऑय ड्राप डालने के बारे में भी बोल सकते है इससे भी उसकी आँखे नुकसान से बच सकती है |

ऊपर बताये गए कारणों से आपके बच्चे की आँखों को कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल पर ज्यादा समय तक कम करने से अनेकों समस्याएँ हो सकती है | हालाँकि इससे आँखों की रोशनी पूरी तरह से नहीं जाती है लेकिन बच्चे को ऐसी समस्याएँ होने लगती है जो उसे जीवन भर परेशान करती रहती है | इसलिए अपने बच्चे को इन समस्याओं से बचाने के लिए आप ऊपर दिए गए उपायों को प्रयोग में लाकर लाभ ले सकते है |





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आइये जाने छुई मुई (लाजवंती) Chhui mui or Humble plant के पौधे के औषधीय गुण |



आयुर्वेद के अनुसार पौधों से हमें कई घातक बिमारियों के उपचार के लिए दवा बनाने में मदद मिलती है साथ ही इनसे स्वास्थ्यवर्धक लाभ भी होते है जिसके कारण व्यक्ति लम्बे समय तक निरोगी और स्वस्थ रहता है | इसी तरह से छुई मुई के पौधे से भी हमें विशेष लाभ मिलते है | शायद ज्यादातर लोग इसके बारे में जानते नहीं है या फिर उन्होंने इसके बारे में केवल किताबों से ही जानकारी ली है |

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उनकी जानकारी के अनुसार छुई मुई के पौधे को हाथ लगाने से इसकी पत्तियां सिकुड़ने लगती है यह बात बिलकुल सच है अगर आप स्वयं भी ऐसा करके देखोगे तो इस जानकारी को सच ही बताओगे | हालाँकि इसके सिकुड़ने के पीछे इसका शर्मीलापन होता है और इसी के कारण इसे लाजवंती, लजौली, शर्मीली या छुईमुई आदि नामों से भी जाना जाता है |

अंग्रेजी भाषा में इस पौधे को मिमोसा प्युडिका के नाम से जाना जाता है और वनस्पति विज्ञान में इसका नाम माईमोसा पुदिका है | यह पौधा अधिक नमी वाले क्षेत्रों में पाया जाता है और इसकी अनेकों शाखाएं होती है | इस पौधे पर गुलाबी रंग के फूल भी आते है |

छुई मुई के पौधे की जड़ से बीज तक सभी का प्रयोग करके अनेकों बिमारियों का उपचार करने में मदद हासिल की जा सकती है | इसका प्रयोग करके आँखों के काले घेरे, आतों के घाव, कब्ज़, शारीरिक कमज़ोरी, नक़सीर, नपुंसकता, नेत्र रोग, मधुमेह रोग, टॉन्सिल्स, पेट के कीड़े, पेट दर्द, फोड़े फुंसी, बदहजमी, बवासीर, डायबीटीज़ आदि का उपचार किया जा सकता है |

आज हम आपको छुई मुई के पौधे के औषधीय गुणों के बारे में बताने जा रहे है जिनसे आप अपने शरीर को रोगमुक्त बनाने में सफल हो सकते है | आइये जानते है छुई मुई के पौधे के खास गुणों के बारे में जो आपके सामने इस प्रकार है :

हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार छुई मुई की पत्तियों और जड़ों में अत्यधिम मात्रा में एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण पाए जाते है जिनसे शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है साथ ही कई रोगों का उपचार भी संभव हो सकता है | इसका प्रयोग करके निम्नलिखित रोगों का उपचार किया जा सकता है :

मधुमेह रोग के उपचार में मदद :

छुई मुई की पत्तियों का प्रयोग करके मधुमेह रोग के दुरन राहत ली जा सकती है | इसके लिए एक काढ़ा तैयार करना पड़ता है जिसके लिए आपको लिए छुइमुइ की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर उबालना है | इसके बाद मिश्रण को छानकर पीने से मधुमेह रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को बहुत फायदा मिलता है |

नपुंसकता का उपचार करने के लिए :

नपुंसकता की समस्या को दूर करने के लिए भी छुई मुई का प्रयोग करके लाभ लिया जा सकता है | इस समस्या को दूर करने के लिए तीन इलायची, तीन ग्राम छुई-मुई की जड़, तीन ग्राम सेमल की छाल को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें | नियमित रूप से इस चूर्ण को दूध के साथ लेने से नपुंसकता की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है |

कमजोरी दूर करने के लिए :

तीन ग्राम छुई मुई के बीजों को पीस कर चूर्ण बना लें | नियमित रूप से इस चूर्ण को दूध के साथ लेने से शारीरिक कमजोरी को दूर करने में मदद ली जा सकती है |

पुराने या नए घाव को ठीक करने के लिए :

दो ग्राम छुई मुई की जड़ को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें | नियमित रूप से इस चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से नए या पुराने किसी भी घाव को ठीक करने में आसानी रहती है |

टॉन्सिल्स का उपचार करने के लिए :

छुई मुई की पत्तियों को बारीक पीसकर इसे दिन में दो बार गले पर लगाने से टॉन्सिल्स का उपचार करने में मदद ली जा सकती है |

शुगर की बीमारी से बचाव करने के लिए :

शुगर रोग से ग्रस्त व्यक्ति को छुई मुई के प्रयोग से बहुत राहत मिलती है | 100 ग्राम छुई मुई के पत्तों का काढ़ा बना लें | नियमित रूप से सुबह शाम इस काढ़े का सेवन करने से कुछ ही समय में शुगर की समस्या को दूर करने में आसानी रहती है |

धातु में वृद्धि करने के लिए फायदेमंद :

नियमित रूप से चार ग्राम लाजवंती के बीज और जड़ का चूर्ण बनाकर एक गिलास दूध के साथ सेवन करना चाहिए | इस उपाय के द्वारा धातु में वृद्धि होने के साथ साथ अन्य समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है |


ऊपर दिए गए उपायों के आधार पर कहा जा सकता है कि लाजवंती का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है जिसका प्रयोग करने से शरीर को अनेकों बिमारियों का उपचार करने में मदद ली जा सकती है | इसलिए छुई मुई के पौधे को हमे नियमित रूप से इस्तेमाल में लाकर स्वयं को रोगमुक्त बनाना चाहिए |