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एक चमत्कारी प्राचीन उपाय जो बदल सकता है आप की तकदीर... और जिससे आप कर सकते है अपनी बहुत सारी इच्छाएं पूरी


व्यक्ति को सुख के समय में शायद किसी साधना, तपस्या या सफलता के लिए किसी उपाय की जरुरत महसूस नहीं होती क्योंकि ऐसे समय व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है लेकिन किसी व्यक्ति के जीवन के दुखों का अंत नहीं हो रहा है तो उसके लिए एक ऐसा उपाय है जिसे अपनाने से उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जायेंगे| वैसे तो दुःख के समय में किये गए कार्यों में सफलता मिलने की बहुत कम संभावनाएं होती है और व्यक्ति हमेशा दुखों से ही घिरा रहता है| व्यक्ति के दुखों और निराशा को दूर करने तथा सफलता पाने के अनेकों उपाय शिवमहापुराण में दिए गए है उन्ही उपायों में से एक उपाय ऐसा है जो आपकी मनोकामनाओ को पूरा करने में मददगार साबित होता है| इस उपाय की विधि इस प्रकार है :

विधि : किसी भी उपाय का इस्तेमाल अच्छे मुहूर्त में करना ही लाभकारी रहता है इसलिए जिस दिन भी आप इस उपाय का प्रयोग करें उस दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान करके उनसे अपने ऊपर कृपया बनाये रखने के लिए प्रार्थना करें|

शिव आराधना के लाभ


नित्य क्रिया से निवृत होकर तथा स्नान करके शरीर को पवित्र कर लेना चाहिए| अगर आप इस उपाय को रविवार, सक्रांति, व्रत-उपवास, श्राद्ध आदि के दिन प्रयोग में लाना चाहते है तो इस दौरान गर्म पानी से स्नान करना उत्तम रहता है| इसके बाद साफ़ कपड़ें पहनकर नदी, तालाब, कुए या सांप के बिल की मिटटी लाकर उससे शिवलिंग का निर्माण कर लें| शिवलिंग का निर्माण करने से भगवान शिव के साथ साथ भगवान श्री राम की कृपा भी आप पर हो जाएगी क्योंकि भगवान श्रीराम जी ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले स्वयं भी बालू रेत से समुन्द्र के किनारे शिवलिंग की स्थापना करके विधिपूर्वक उसका पूजन भी किया था और भगवान श्रीराम ने कहा था कि शिवजी के समान मुझे कोई दूसरा प्रिय नहीं है जो मनुष्य रामेश्वरम जी के दर्शन करेंगे और गंगाजल चढ़ाएंगे वे मुक्ति पाकर मेरे लोक को जायेंगे|   

शिवलिंग का निर्माण अपने घर पर या पीपल के पेड़ के नीचे भी किया जा सकता है| घर में किसी पवित्र और शांत स्थान का चुनाव करके वहां पर कुश का आसन लगा लें तथा बैठकर मुख को उत्तर दिशा की तरफ कर लें| जहाँ आपने आसन लगाया है शिवलिंग आपके बिलकुल सामने की तरफ होना चाहिए तथा विधि के अनुसार स्नान करवाकर उन पर पूजन सामग्री चढ़ा दें| पूजन सामग्री में फूलों का हार, चावल, कुमकुम, प्रसाद, वस्त्र आदि होने चाहिए| पूजा करते समय इनमे से बारी – बारी सामग्री को शिवलिंग पर अर्पित करते रहना चाहिए|

यह उपाय सुख में वृद्धि करता है :

इस उपाय का नियमित रूप से प्रयोग करके व्यक्ति अपने जीवन के दुखों को खत्म करके सुख की प्राप्ति कर सकता है| यह उपाय व्यक्ति के जीवन से दुखों को खत्म करने में बहुत मददगार होता है| जरुरी नहीं है कि इन उपायों को दुःख के समय में ही किया जाये| सुख के समय में इन उपायों को करने से लम्बे समय तक सुखी जीवन की प्राप्ति की जा सकती है|

आयु वृद्धि में सहायक : 

इस बात का शिवपुराण में भी विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है कि जो व्यक्ति शिवजी क भक्ति (कृपा) करते है उनकी आयु में वृद्धि हो जाती है| ऐसा करने वाले व्यक्ति लम्बे समय तक जीवन जीते है और उन्हें इस दौरान सभी सुख सुविधाएं मिलती है|

धन वृद्धि के लिए लाभदायक : 

शिव की पूजा अर्चना करके लक्ष्मी माता सहित सभी देवताओं की कृपया पाई जा सकती है| इस उपाय के द्वारा घर का माहौल पवित्र और सकारात्मक बनाया जा सकता है जिसके कारण घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है|

उत्तम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद : 

इस उपाय के द्वारा साथ ही शिवजी की साधना से व्यक्ति शारीरिक रूप से निरोगी और शक्तिशाली बनता है| शिव की साधना करने वाले व्यक्ति में रोगों से बचने और लड़ने की शक्ति में वृद्धि होती है|

स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है : 

इस उपाय की साधना करने वाले व्यक्तियों की आत्मा मृत्यु के पश्चात स्वर्ग लोक में निवास करती है| ऐसे व्यक्ति अपने जीवन काल में भी सभी भौतिक वस्तुओं को भोगते है तथा मौज भरा जीवन व्यतीत करते है|

शनि, मंगल और अन्य ग्रहों के दोषों से बचाव :

जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि देव या अन्य किसी ग्रह के दोष होने से परेशानी चल रही है तो इस उपाय को करने से उन दोषों से बचा जा सकता है| इस उपाय को करके राहू-केतु के दोष को भी शांत करने में मदद मिलती है| मंगल का मांगलिक दोष होने पर भी इस उपाय के द्वारा लाभ लिया जा सकता है क्योंकि मंगल का पूजन शिवलिंग के रूप में ही होता है|

गृह कलेश को दूर करने में मददगार : 

शिवजी की साधना करके घर-परिवार की सभी परेशानियों का निवारण किया जा सकता है जिससे घर में सुख शांति आती है| इस उपाय की साधना से दंपत्ति के जीवन में तालमेल बढ़ने लगता है और उनमे आपसी लड़ाई खत्म हो जाती है|

मानसिक शांति के लिए :

 इस उपाय की साधना नियमित रूप से करने से व्यक्ति तनाव मुक्त हो जाता है और उसको मानसिक शांति की प्राप्ति हो जाती है| व्यक्ति अपने जीवन काल में उपलब्ध सुख सुविधाओं से पूर्ण रूप से संतुष्ट रहता है| यह उपाय व्यक्ति को संतुष्ट करने में बहुत लाभदायक होता है|


Jeevan Ke Pavitra Aur Anmol Vachan In Hindi | Holy and precious word of life

जीवन के पवित्र और अनमोल वचन | Holy and precious word of life

1)हे मनुष्य तू अपने इस शरीर को रथ समझते हुए , अपनी आत्मा को उस रथ में विराजमान युद्ध करने वाला योद्धा मान , वायु की गति से भी तेज चलने वाले अपने मन को उस रथ में जुता हुआ अश्व मान, अपनी बुद्धि को उस रथ का सारथी समझ , और अपने विवेक को अपने अश्वो की  लगाम  मानते हुए अपने जीवन में आने वाली सभी रुकावटों का सामना करते हुए , अपनी जीवात्मा को सदैव अच्छे मार्ग पर चलाते हुए अपने जीवन की यात्रा करनी चाहिए |

Jeevan Ke Pavitra Aur Anmol Vachan In Hindi

2)कर्म  को बोओ और आदत रूपी फसल को काटो अर्थात यदि हमारी आदते अच्छी होंगी तो हमारा चरित्र अच्छा होगा और जब हमारा चरित्र अच्छा होगा तो, हमारा नसीब अपने आप ही अच्छा हो जायेगा |

3)इस संसार में बहुत सारे मंदिर है परन्तु उन सभी मंदिरो में सबसे पवित्र मंदिर है हमारा शरीरहमारे इस शरीर रूपी स्वरूप से अधिक कोई पवित्र स्थान इस संसार में कहीं और नहीं है |

4)हे मानव तू अपने मन , वचन , और कर्म से इस संसार में कभी किसी को किसी भी प्रकार का का दुःख नहीं देना चाहिए | तुझे हमेशा नफ़रत को प्रेम से क्रोध को क्षमा की भावना से , विरोध को अनुरोध से, घृणा को दया से और हिंसा को अहिंसा की भावना से जीतना चाहिए |

5)इस संसार में जो अच्छे कार्य करता है वो आत्मा महान है और जो इस संसार में रहते हुए बुरे कार्य करता है वो बहुत ही तुच्छ प्राणी है | जन्म के समय प्राणी अपने मस्तक पर तो  अच्छे तिलक लगाकर आता है, और ही बुरे कार्य का तिलक लगाकर आता है|

6)जिस प्राणी को उसकी इन्द्रियों ने जीत लिया है अर्थात अपने वश में कर लिया है वो इस संसार में कुछ नहीं कर पाता  है अर्थात सारी आयु वो अपने लक्ष्य से विहीन होकर इधर -उधर भटकता रहता है | और जिसने अपनी इन्द्रियों को जीत लिया है अर्थात अपनी इन्द्रियों को अपने काबू में कर रखा है उसको अपने लक्ष्य से कोई दूर नहीं कर सकता | 


7)हमारी असली कमजोरी ये है की हम अपने आप को सुधारने का प्रयत्न कम से कम करते है, और दुसरो को सुधारने का प्रयत्न ज्यादा से ज्यादा करते है |