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बड़े से बड़े घाव को आसानी से भर सकता है सत्यानासी का पौधा | Satyanashi ka Paudha Bhare Har Ghaav | Satyanashi Plant Cures every Wound



जो नाम सुनने में ही अजीब सा लगे उससे किसी को कैसे फायदा हो सकता है और कौन इसे अपने घर में लाकर इसका लाभ लेने का प्रयास करने की कोशिश करेगा| हालाँकि दवाइयों और वनस्पतियों के नाम अंग्रेजी भाषा में ज्यादा अच्छे माने जाते है लेकिन उनके असली गुणों या अवगुणों के बारे में उनके स्थानीय नामो से ही अधिक पता लगाया जा सकता है|

उदाहरण के लिए मार्निंग ग्लोरी पौधे के अंग्रेजी नाम के बजाय इसके गुणों के कारण स्थानीय नाम बेशरम या बेहया से पहचाना जा सकता है| इसी तरह से सु-बबूल का भी कुछ ऐसा ही उदाहरण है| यह पौधा तेजी से फैलता है और समस्या का कारण बनता है इसलिए इसका नाम कु-बबूल रख दिया गया है|

वैसे कई पौधों के अंग्रेजी नाम भी उनके अवगुणों के बारे में बता देते है जैसे बायोडीजल के नाम से प्रचारित जैट्रोफा का उदहारण है| इस तेल से बायोडीजल बनाया जाता है लेकिन इसे ब्रिटेन में हेल आयल (नरकीय तेल ) के नाम से जाना जाता है| इसका ऐसा नाम इसलिए है क्योंकि इस तेल में कैंसर को बढ़ावा देने वाले तत्वों की अधिकता होती है|

बाकी बातों को छोड़कर हम सत्यानाशी पौधे पर विचार करते है| यह पौधा बेकार और बंजर जमीन पर पैदा होता है तथा यह कांटेदार प्रवृति का होता है इसी कारण लोग इसे पसंद भी नहीं करते है| अगर यह पौधा किसी घर के पास उग जाये तो इसे उखाड़ कर फैक दिया जाता है| गाँवों में तांत्रिक व ओझा इस पौधे का इस्तेमाल भूत उतारने के लिए करते है| इसके कांटो को प्रभावित महिला की पिटाई करने के लिए किया जाता है तथा कई बार इसके काँटों पर लेटाकर भी भूत निकालने का प्रयास किया जाता है| इसके अलावा यह पौधा तंत्र साधना के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है|
इस तरह के पौधे और वनस्पतियों से लोग दूर ही रहना पसंद करते है| सत्यानाशी को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में अनेक प्रथाएं और विश्वास प्रचलित है| कुछ लोग इसे अशुभ और बेकार मानते है तो व्यापारी लोग इसका इस्तेमाल मुनाफा कमाने के लिए करते है|

Satyanashi Plant Cures every Wound


सत्यानाशी के पौधे को विज्ञान द्वारा आर्जिमोन मेक्सिकाना नाम दिया गया है| यह पौधा मेक्सिको देश में अधिक मात्रा में पाया जाता है लेकिन भारतीय चिकित्सा ग्रंथो में इसके अनेक गुणों का विस्तार से वर्णन किया गया है| इस पौधे का संस्कृत भाषा में स्वर्णक्षीरी नाम है और इसके इस नाम से ऐसा लगता है मानो यह स्वर्ग की कोई वनस्पति है|

हैरानी की बात तो यह है कि सत्यानाशी के बीज से जो रोग फैलता है इसकी पत्तियों और जड़ से उस रोग की चिकित्सा की जा सकती है| देश के अधिकतर हिस्सों में इससे फैलने वाले रोगों का उपचार इसी विधि द्वारा किया जाता है| देश के विभिन्न हिस्सों में इसको अलग अलग नामो से जाना जाता है ये नाम इस प्रकार है :

संस्कृत- स्वर्णक्षीरी, कटुपर्णी
कन्नड़- दत्तूरि
गुजराती- दारुड़ी
तमिल- कुडियोट्टि
तेलुगू- इट्टूरि
हिन्दी- सत्यानाशी, भड़भांड़, चोक
मराठी- कांटेधोत्रा
बंगाली- चोक, शियालकांटा
मलयालम- पोन्नुम्माट्टम
इंग्लिश- मेक्सिकन पॉपी
लैटिन- आर्जिमोन मेक्सिकाना |

इस पौधे के चारो तरफ कांटे ही कांटे होते है और इसकी ऊंचाई लगभग 2 – 3 फीट तक हो सकती है तथा यह पौधा वर्षाकाल और शीतकाल के मौसम में पोखरों, खाइयों और तलैयों के किनारे अधिक से अधिक पाया जाता है| इस पर पीले रंग के फूल लगते है जिनकी पांच से साथ पंखुड़ी होती है| इसके बीज का आकार और रंग रूप राइ के बीज जैसा होता है तथा इसके पत्तों और फूलों से पीले रंग का दूध निकलता है|
इसकी जड़, बीज, दूध और तेल का उपयोग करके बहुत फायदा लिया जा सकता है| इसका तेल बनाने के लिए सत्यानाशी पंचांग का इस्तेमाल किया जाता है| यह तेल बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावशाली होता है क्योंकि इसका इस्तेमाल करके बड़े से बड़ा घाव भरा जा सकता है|

तेल बनाने की विधि :

सबसे पहले अपने शरीर का बचाव करते हुए इस पौधे को जड़ से उखाड़ कर इसे पानी में धो कर साफ़ कर लें| इसके बाद इसको कूट कर इसका रस निकाल लें और रस में लगभग एक चौथाई मात्रा के बराबर सरसों का तेल मिलकर हल्की आंच पर गर्म करने के लिए रख दें| ठीक तरह से पकने के बाद जब केवल तेल ही बाकी रह जाये तब मिश्रण को आंच से नीचे उतारकर ठंडा होने दे और बाद में डिब्बे या शीशी में भर लें| इस तेल को व्रणकुठार तेल का नाम दिया गया है|

प्रयोग करने की विधि :

इस तेल का प्रयोग करके किसी भी बड़े से बड़े घाव को जल्दी ही ठीक किया जा सकता है | इसका इस्तेमाल करने के लिए घाव को पानी से धो लें| पानी में नीम की पत्तियां जरुर डाल लें| इसके बाद रुई को तेल में डुबोकर घाव पर लगाना चाहिए| घाव ज्यादा समय पुराना हो या ज्यादा गंभीर हो तो अधिक लाभ लेने के लिए तेल में रुई डुबोकर घाव पर पट्टी की मदद से बांधकर रखना चाहिए| इस उपाय से कुछ ही दिनों में बड़े से बड़ा घाव ठीक करके परेशानी से छुटकारा पाया जा सकता है|


शरीर को सुन्दरता और शक्ति प्रदान करने में आंवले के अनमोल फायदे | Amazing Health benefits of Amla



साधारण सा दिखने वाला आंवला गुणों का भंडार है जिससे सभी रोगों का अंत किया जा सकता है| रोगों को दूर करने के साथ ही शरीर को सुन्दरता और शक्ति प्रदान करने के लिए भी आंवला बहुत महत्वपूर्ण होता है| आंवला युवको को यौवन शक्ति प्रदान करने में सहायक होता है तथा उम्र में वृद्धि करने में भी मददगार होता है| आंवले में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है इसलिए हमें नियमित रूप से आंवले का सेवन करना चाहिए| आंवले के अन्य फायदे जो हमारे शरीर को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाते है इस प्रकार है :


Amazing Health benefits of  Amla


1.      आंवला ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्तियों के लिए रामबाण का काम करता है|
2.      आंवले का सेवन करके अंडे से ज्यादा शक्ति प्रदान की जा सकती है|
3.      आंवला गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है उन्हें इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए|
4.      आंवले के चूर्ण को मूली के साथ सेवन करके मूत्राशय की पत्थरी सम्बन्धी समस्या को दूर किया जा सकता है|
5.      टूटी हुई हड्डियाँ जोड़ने के लिए आंवले का सेवन बहुत लाभदायक रहता है|
6.      आंवले के रस के साथ शहद मिलाकर सेवन करने से मधुमेह सम्बन्धी रोग ठीक किये जा सकते है|
7.      आंवले के रस का नियमित रूप से सेवन करने से आँखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है|
8.      नकसीर की समस्या होने पर आंवले का इस्तेमाल करके लाभ लिया जा सकता है| इसके लिए आंवले को रात को पानी में भिगो दें और इसके पानी से सिर को धो लें तथा इसके रस को नाक में टपका कर लाभ लिया जा सकता है|
9.      पाचन शक्ति बढ़ाने और पेट साफ़ करने के लिए आंवले के चूर्ण का सेवन करके लाभ लिए जा सकता है|
10.  नियमित रूप से आंवले के रस का सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म किये जा सकते है|
11.  अच्छे स्वास्थ्य के लिए आंवले के रस के साथ शहद मिलाकर साथ में दूध का सेवन करना चाहिए| इस उपाय का प्रयोग नियमित रूप से करने से स्वास्थ्य अच्छा होने के साथ साथ मन भी प्रसन्न रहता है| इससे चेतना और शक्ति में वृद्धि होती है|
12.  गले सम्बंधित समस्या जैसे गला बैठ जाने के दौरान आंवले की फली का सेवन करके फायदा लिया जा सकता है|
13.  गर्मी के मौसम में चक्कर आने की समस्या से निजात पाने के लिए आंवले का सेवन करना चाहिए|
14.  गर्भावस्था के समय में उल्टी होने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आंवले का सेवन किया जा सकता है|
15.  चेहरे से दाग धब्बे दूर करने के लिए आंवले के चूर्ण का उबटन चेहरे पर लगाकर लाभ लिया जा सकता है|
16.  वृद्दावस्था को दूर करके लम्बे समय तक युवावस्था बनाये रखने के लिए आंवले का सेवन करना बहुत फायदेमंद रहता है| इसके लिए नियमित रूप से 2 चम्मच आंवले का चूर्ण खाने के साथ सेवन करना चाहिए|
17.  आंवले का प्रयोग करके बाल काले किये जा सकते है| आंवले की खटाई को बालों की सफाई के लिए इस्तेमाल करके फायदा लिया जा सकता है| इसलिए नियमित रूप से आंवले का सेवन करके लाभ लेना चाहिए|

सर्दियों में आंवले के अनमोल फायदे :


वैसे तो आंवले का प्रयोग किसी भी समय करके लाभ उठाया जा सकता है क्योंकि यह हर मौसम में कारगर और गुणकारी साबित होता है और व्यक्ति को स्वस्थ व निरोगी बनाने में मददगार साबित होता है| लेकिन सर्दियों के मौसम में नियमित रूप से आंवले का सेवन करके विशेष रूप से लाभ प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि इसमें पकने के बाद भी विटामिन सी विद्यमान रहता है जो हमारे लिए बहुत फायदेमंद होता है| इसके अलावा आंवले में अत्यधिक मात्रा में क्रोमियम नामक तत्व पाया जाता है| आंवला सुखा हो, हरा या ताजा हो इसमें गुण कभी खत्म नहीं होते क्योंकि इसकी अम्लता इसके गुणों की रक्षक होती है| आयुर्वेद के अनुसार आंवले को रसायन की संज्ञा दी गयी है| उदाहरण के तौर पर च्वनप्राश एक प्रसिद्द आयुर्वेदिक रसायन है जिसका इस्तेमाल लगभग प्रत्येक व्यक्ति करके लाभ प्राप्त करता है| इससे शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति में वृद्धि होती है| इनके अलावा आंवले का सेवन ठण्ड के मौसम में करने से निम्नलिखित फायदे हो सकते है जो इस प्रकार है :

1.      त्वचा रोग, बाल तथा नेत्र रोग दूर करने के लिए आंवले का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन्स प्रचुर मात्रा में होते है जो रोगों का नाश करने में मददगार होते है|
2.      सुबह खाली पेट आंवले के रस का सेवन शहद और गर्म पानी के साथ करके मोटापे की समस्या से निजात पाई जा सकती है| जिन व्यक्तियों का शहद से परहेज है वे पांच आंवलो का रस गुनगुने पानी के साथ करके लाभ ले सकते है|
3.      आंवले से पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करने से साथ साथ किडनी को भी लाभ पहुँचाया जा सकता है|
4.      अर्थराइटिस के दर्द से छुटकारा पाने के लिए आंवले का प्रयोग करना चाहिए|
5.      सर्दी, खांसी और जुकाम आदि बिमारियों से बचने के लिए आंवले का प्रयोग किया जा सकता है|
6.      एक ग्राम आंवला पाउडर और उचित मात्रा में चीनी मिलाकर एक गिलास पानी या दूध के साथ पीने से एसीडिटी की समस्या से निजात पाई जा सकती है|
7.      मोतियाबिंद की बीमारी को दूर करने के लिए आंवले के जूस को शहद के साथ मिलाकर लेने से राहत मिलती है|
8.      आंवले का नियमित रूप सेवन करके कब्ज की समस्या को दूर किया जा सकता है साथ ही डायरिया जैसी समस्या से भी निपटने में मदद ली जा सकती है| इसके लिए खाने के साथ आंवला पाउडर, शहद और मक्खन का मिश्रण करके सेवन करना चाहिए|
9.      दिल से सम्बंधित बिमारियों तथा दिल की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करने ले लिए ठण्ड के मौसम में नियमित रूप से आंवले का सेवन करना चाहिए|
10.  डायबिटीज रोग को दूर करने के लिए आंवले का प्रयोग करके लाभ लिया जा सकता है|

11.  आयुर्वेद के अनुसार आंवले, गिलोय और गोखरू को बराबर मात्रा में लेकर एक प्रकार का चूर्ण तैयार किया जाता है जिसे रसायन चूर्ण का नाम दिया गया है इसका सेवन नियमित रूप से करने से बुढ़ापे की समस्या को लम्बे समय तक टाला जा सकता है|

हल्दी है औषधीय गुणों का भंडार | Haldi hai aushdhiya guno ka bhandar | health benefits of turmeric


हमारे देश के प्रत्येक रसोई घर में हल्दी का प्रयोग किया जाता है लगभग सभी को इसके रंग रूप की पहचान होती है| ज्यादातर लोग खाने के अलावा हल्दी के छोटे मोटे लाभों या प्रयोगों के बारे में जानते है जैसे चोट लगने पर दूध के साथ प्रयोग करना और खून को साफ करने के लिए इस्तेमाल करना आदि| लेकिन हल्दी में कुछ ऐसे गुण पाए जाते है जिनके बारे में आप अभी तक अनजान हो सकते है क्योंकि हल्दी का प्रयोग करके अनेको बिमारियों का सफल उपचार किया जा सकता है|
आइये जानते है कि हल्दी वे कौन से गुण होते है जो हमारे लिए अत्यंत लाभकारी साबित होते है| इनमे से कुछ खास गुणों का विवरण इस प्रकार है :

1.      हल्दी के अन्दर प्राकृतिक रूप से एंटिसेप्टिक एवं एंटिबैक्टेरियल तत्व पाए जाते है जिनसे शरीर के जले कटे घावो पर होने वाले विषाणुओं का नाश किया जा सकता है| हल्दी का प्रयोग करने से आसानी से कोई भी घाव भरा जा सकता है|

haldi ke gun


2.      अगर कभी आपको तले भुने खाने से परेशानी महसूस हो रही हो तो इसके उपचार के लिए हल्दी का इस्तेमाल करके फायदा लिया जा सकता है| इसके लिए एक चुटकी हल्दी पाउडर की फंकी लेने से आपकी समस्या दूर हो जाएगी|

3.      चर्बी बढ़ने की समस्या से समाज का बहुत बड़ा वर्ग परेशान है इसके लिए भी हल्दी बहुत कारगर साबित होती है क्योंकि हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन नामक तत्व मोटापे की समस्या को कम करने में मददगार होता है| इससे शरीर में वसा को जमा करने वाले उत्तको पर प्रभाव पड़ता है तथा उनकी वृद्धि को रोका जा सकता है| इसके अलावा फैट मेटाबोलिज्म के लिए भी यह फायदेमंद रहता है|

4.      चेहरे से काले तिल हटाने के लिए हल्दी कर प्रयोग करके लाभ लिया जा सकता है| जिस स्थान पर काले तिल होते है वहां पर हल्दी लगाने से उस स्थान की कोशिकाएं खत्म हो जाते है| इसके साथ साथ हल्दी से त्वचा में निखार लाने में मदद मिलती है|

5.      इससे मस्तिष्क सम्बन्धी समस्या के दौरान भी राहत ली जा सकती है| हल्दी का इस्तेमाल करने से मस्तिष्क में बनने वाले एम्लोयड प्लॉक की वृद्धि एवं निर्माण रोककर एल्जाइमर्स की बढ़त पर नियंत्रण किया जा सकता है|

6.      प्रोटेस्ट कैंसर से बचाव करने के लिए हल्दी का प्रयोग फूलगोभी के साथ करना चाहिए| इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति पहले से ही इस रोग से पीड़ित होता है तो हल्दी के प्रयोग से इस रोग का प्रभाव कम किया जा सकता है|

7.      हल्दी से विभिन्न प्रकार के कैंसर की समस्या के दौरान फायदा लिया जा सकता है| हल्दी का नियमित प्रयोग करने से बचपन में होने वाले ल्यूकेमिया रोग यानी रक्त कैंसर से बचाव किया जा सकता है|

8.      कीमोथैरेपी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पैक्लिटेक्सेल दवा के प्रभाव को बढ़ाने और इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए भी हल्दी का इस्तेमाल करके लाभ लिया जा सकता है|
9.      हल्दी का प्रयोग करके दाह और जलन की समस्या को दूर किया जा सकता है| हल्दी कई प्रकार के एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स से ज्यादा प्रभावशाली औषधि है तथा इसके प्रयोग से किसी को कोई नुक्सान होने की संभावना भी नहीं हो रहती है|

10.  हल्दी के प्राकृतिक तत्व है जो आर्थ्राइटिस और रिह्यूमेटाइड ऑर्थ्राइटिस निरोधक होता है|
11.  हल्दी को नियमित रूप से प्रयोग करने पर शराब के कारण क्षतिग्रस्त हुए लीवर का उपचार करने में आसानी होती है|

12.  सर्दी के समय नाक बंद होने की समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को सुबह के समय नीम, काली मिर्च, शहद और हल्दी का मिश्रण करके सेवन करना चाहिए| इस मिश्रण का सेवन करने से सर्दी में मौसम में होने वाली छोटी मोटी बिमारियों का उपचार आसानी से किया जा सकता है|

इस प्रकार हम कह सकते है कि साधारण सी दिखने वाली हल्दी में अनेकों औषधीय गुण पाए जाते है जो हमें अनेकों बिमारियों से बचाने में मददगार होते है साथ ही गंभीर रोगों के प्रभाव को कम करने में भी लाभकारी होते है| हमें हल्दी का लाभ लेने के लिए इसका इस्तेमाल नियमित रूप से करना चाहिए|




ऐसें निपटें गर्दन के असहनीय दर्द और परेशानी से | Neck pain Door Karne ke liye Ayurvedic Gharelu Nuskhe | गर्दन के दर्द का घरेलू उपचार



किसी भी प्रकार का दर्द हमेशा व्यक्ति को परेशान करता है| इनमे चाहे हाथ पैर का दर्द हो पेट का दर्द या सिर का दर्द सभी व्यक्ति को पीड़ा देते है लेकिन इनमे सबसे ज्यादा परेशान करने वाला दर्द गर्दन का दर्द है| गर्दन का दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है| गर्दन का दर्द असहनीय होता है जिसके कारण मनुष्य किसी भी वस्तु का प्रयोग सही ढंग से नहीं कर पाता है और सामान्य तरीके से उठने-बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है|

इस समस्या में गर्दन इस तरह से हो जाती है कि आसानी से सीधी नहीं हो पाती है और जिस तरफ गर्दन अकड़ जाती है गर्दन उसी तरफ रखना व्यक्ति की मज़बूरी हो जाती है| गर्दन का दर्द ज्यादा खतरनाक समस्या नहीं है लेकिन अगर सही समय पर इसके लक्षणों की पहचान करके इसका उपचार ना किया जाये जो यह दर्द काफी भयंकर हो सकता है |


ऐसें निपटें गर्दन के असहनीय दर्द और परेशानी से


किसी भी उम्र के इंसान में सरर्वाइकल स्पांडिलाइसिस का कारण गर्दन के आस पास मेरुदंड की हड्डियों में अनावश्यक वृद्धि के कारण और गर्दन की कोशिकाओं के बीच इंटरवर्टिब्रल डिस्क में कैल्शियम का डी-जनरेशन इन डिस्क के अपने स्थान से हटने या सरक जाने के कारण होता है| आमतौर पर C5-C6-C7 और C4 और C5 के बीच की डिस्क पर ही इसका बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है|
गर्दन दर्द के कारणों की पहचान : 

गर्दन में दर्द होने के बहुत से कारण हो सकते है इनमे से कुछ इस प्रकार है जैसे – बिना आराम किये लम्बे समय तक कंप्यूटर पर काम करते रहना, लेटकर टीवी देखना, गर्दन झुककर पढाई करना, जोर से गर्दन झटकना, सोते समय गर्दन की नीचे ज्यादा मोटाई वाले तकिये का प्रयोग करना या फिर लम्बे समय तक मोबाइल पर बातें करना आदि| इन कारणों के अलावा फ़ास्ट फ़ूड और जंक फूड्स तथा नियमित रूप से मसालेदार और तीखे व्यंजनों का सेवन करना भी इस समस्या की वजह हो सकती है|

गर्दन दर्द से निपटने के घरेलू उपचार :

1.     अदरक का चूर्ण और पेस्ट बनाकर : अदरक का इस्तेमाल गर्दन दर्द के लिए बहुत लाभदायक होता है| अदरक को आयुर्वेद में दर्द नाशक दवा का नाम दिया गया है| अदरक को बारीक़ पीस कर तैयार पाउडर को एक गिलास पानी में मिलाकर गर्दन पर मलने से बहुत फायदा मिलता है| इसके अलावा अदरक को रगड़ कर उसका पेस्ट तैयार करके गर्दन पर लगाने से भी दर्द में राहत ली जा सकती है|
2.     गर्म पानी से सिकाई करके : गर्म पानी से गर्दन की सिकाई करने से गर्दन दर्द में आराम मिलता है| एक प्लास्टिक की बोतल में गर्म पानी डालकर इससे गर्दन की सिकाई करना बहुत फायदेमंद रहता है| इससे रक्त बहाव की गति में वृद्धि होकर दर्द से निजात मिलती है| हालाँकि एक बात का ध्यान अवश्य रखें की सिकाई के तुरंत बाद खुली हवा में ना निकलें और ना ही किसी ठन्डे पैय पदार्थ का सेवन करना चाहिए|
3.     मालिश : गर्दन दर्द के दौरान मालिश करके भी इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है| मालिश बिलकुल हल्के हाथों से करनी चाहिए ज्यादा दबाव डालकर की गयी मालिश से दर्द बढ़ सकता है| मालिश के लिए तिल के तेल या सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है| 
4.     बर्फ के टुकड़े का प्रयोग : गर्मियों के समय में गर्दन दर्द होने पर बर्फ के टुकड़ों को कपडे में लपेटकर गर्दन पर रखने से इस समस्या से निजात पाई जा सकती है|
5.     गर्म पानी का प्रयोग नहाने के लिए करना चाहिए : गर्दन दर्द से राहत पाने के लिए गर्म पानी से नहाना बहुत लाभदायक होता है| गर्म पानी से दर्द वाली जगह की सिकाई होकर थोड़ी देर में दर्द से शांति मिल जाएगी|
6.     कपूर और हींग का प्रयोग करके : कपूर और हींग को बराबर मात्रा में लेकर एक कटोरी सरसों के तेल में मिलाकर मिश्रण बना लें| इसके बाद इस मिश्रण से गर्दन की मसाज करने से दर्द खत्म हो जाता है|
7.       बैठने की मुद्रा ऐसी रखें : बैठने की सही मुद्रा बनाकर भी गर्दन के दर्द से बचा जा सकता है| पीठ को दीवार के सहारे लगाकर बिलकुल सीधा रखकर बैठना चाहिए और इस दौरान गर्दन भी बिलकुल सीधी रखनी चाहिए| इसके बाद भी दर्द में आराम ना मिले तो यह सर्वाइकल की समस्या हो सकती है इसके लिए किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर ही उपचार कराना चाहिए|
8.       अन्य उपाय : ऊपर दिए गए घरेलू उपायों के अलावा कुछ अन्य उपाय भी है जिनके द्वारा गर्दन के दर्द में राहत ली जा सकती है इनमे से कुछ इस प्रकार है – अपनी गर्दन को इस तरह से घुमाना चाहिए जिस प्रकार घडी की सुई घुमती है| इस तरह का अभ्यास दिशा बदलकर करते रहना चाहिए| अपनी क्षमतानुसार जब तक आप ऐसा कर सकते है करते रहें| दर्द महसूस होने पर इस क्रिया का अभ्यास बंद कर दें| जितने ज्यादा समय तक आप अभ्यास करेंगे आपकी गर्दन का दर्द उतना ही कम होता चला जायेगा|